Jhurangu, Pauri Garhwal, Uttarakhand- Mr. Amit Bhadula
My Village Jhurangu (झुड़ंगू)
- श्री देवराम जी
- श्री दत्तराम जी
- श्री लोकमणि जी
- श्री चन्द्रमणि जी
- श्री उपेन्द्र दत्त जी
झुरंगु गांव, यद्यपि का प्रत्यक्ष भाग नहीं है, तथापि यह उसके समीप स्थित बफर ज़ोन में अवस्थित है। यह बफर क्षेत्र उस मुख्य अभयारण्य (कोर ज़ोन) का परिधीय विस्तार होता है, जहाँ सीमित मानवीय गतिविधियों के साथ-साथ वन्य जीवन अपनी स्वाभाविक लय में विद्यमान रहता है। इस प्रकार झुरंगु, मानव और प्रकृति के संतुलित सह-अस्तित्व का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
यहाँ का वन्य परिवेश अत्यंत समृद्ध एवं विविधतापूर्ण है। घने वनों और पहाड़ी ढलानों के मध्य अनेक प्रकार के जीव-जंतु स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं, जो इस क्षेत्र की जैव-विविधता को अद्वितीय बनाते हैं।
🦌 यहाँ पाए जाने वाले प्रमुख वन्यजीव:
- चीतल (हिरन) – जिनकी कोमल चाल और झुंडों में विचरण प्रकृति की लय को जीवंत कर देते हैं।
- सांभर – गहन वनों की निस्तब्धता में अपनी उपस्थिति दर्ज कराता एक विशाल हिरन।
- हिमालयी बकरी – दुर्गम शिखरों पर सहजता से विचरण करने वाली अद्भुत प्राणी।
- भालू – वन की गहराइयों का शांत किंतु प्रभावशाली निवासी।
- मोर – अपनी रंग-बिरंगी छटा से प्रकृति में सौंदर्य का संचार करता हुआ।
- जंगली मुर्गी – वनों की भोर को अपनी ध्वनि से जागृत करती हुई।
- गुलदार (तेंदुआ) – छायाओं में विलीन रहकर अपनी उपस्थिति का आभास कराता हुआ चपल शिकारी।
- हाथी – विशालकाय और सामूहिक जीवन का प्रतीक, जो वन की गरिमा को और बढ़ाता है।
- लोमड़ी, खरगोश एवं जंगली सूअर – वन्य जीवन की विविधता को संतुलित बनाए रखने वाले जीव।
- बाघ – वन का गौरव, जिसकी उपस्थिति इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी की समृद्धि का द्योतक है।
- तेंदुआ – तीव्र गति और कुशलता का अद्वितीय उदाहरण।
- विविध पक्षी प्रजातियाँ – यहाँ सौ से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो आकाश को अपने मधुर कलरव से गुंजायमान कर देती हैं।
इस प्रकार झुरंगु का वन्य जीवन केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि उस पारिस्थितिक संतुलन का प्रतीक है, जिसमें प्रत्येक जीव का अपना एक विशेष स्थान और महत्व है। यहाँ प्रकृति अपने पूर्ण वैभव में, निसर्ग की अनंत कथाएँ सुनाती प्रतीत होती है।
| 🌿 झुरंगु गांव – प्रकृति की गोद में बसा एक नन्हा स्वर्ग |
भौगोलिक स्थिति:
झुरंगु गांव हल्दूखाल से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहले गांव तक पहुँचने के लिए जंगलों से होकर पैदल जाना पड़ता था, लेकिन अब पक्की सड़क मार्ग बन जाने के कारण यह सफर काफी सुगम हो गया है। गांव से सबसे नजदीकी बाज़ार हल्दूखाल है, जो इस क्षेत्र का मुख्य व्यापारिक केंद्र है। झुरंगु का प्रशासनिक ब्लॉक नैनीडांडा है, जो हल्दूखाल से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
🚗 सड़क मार्ग और विकास:
पूर्व प्रधान श्री पीताम्बर दत्त भदूला जी ने अपने कार्यकाल में समस्त ग्रामवासियों के सक्रिय सहयोग से बुड़ाकोट से झुरंगु तक एक पर्याप्त चौड़ाई वाला पैदल मार्ग/सड़क का निर्माण कराया था। यह मार्ग न केवल सुव्यवस्थित एवं मजबूत था, बल्कि इतना सक्षम भी था कि उस पर टैक्सी जैसे वाहनों का आवागमन संभव हो सका। यही मार्ग आगे चलकर गांव तक सड़क पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार सिद्ध हुआ।
यदि उस समय इस प्रकार का चौड़ा एवं उपयुक्त मार्ग निर्मित न किया गया होता, तो वन विभाग के कड़े नियमों एवं मार्ग में स्थित पेड़ों के कारण सड़क निर्माण हेतु स्वीकृति प्राप्त करना अत्यंत कठिन, लगभग असंभव हो सकता था।
वर्तमान में इस मार्ग के कारण ग्रामीण अपनी निजी गाड़ियों अथवा टैक्सी से सरलता एवं सुविधा के साथ हल्दूखाल तक आवागमन कर पा रहे हैं। तथापि, अभी भी मार्ग का समुचित विस्तार कर इसे ट्रक एवं बसों के संचालन योग्य बनाना आवश्यक है, ताकि क्षेत्र के विकास को और अधिक गति मिल सके।
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| Jhurangu |
👥 सामाजिक संरचना:
गांव में भदूला, कुकरेती, सेमवाल, शिल्पकार लोग सहित कई अन्य जातियों के लोग मिलजुलकर सदियों से निवास करते आ रहे है।
हालांकि आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के चलते गांव के कई लोग देश के अलग-अलग शहरों में रोजगार, शिक्षा व व्यवसाय हेतु बस गए हैं, लेकिन उनका मन आज भी अपने गांव से गहराई से जुड़ा हुआ है।
🌲 प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण:
झुरंगु, कॉर्बेट नेशनल पार्क के बफर ज़ोन में होने के कारण वन्य जीवन और जैव विविधता में समृद्ध है।
यहां आसपास के जंगलों में चीतल, सांभर, तेंदुआ, बाघ, हिमालयी बकरी और विभिन्न पक्षियों की प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं। वर्तमान में हाथियों का झुण्ड भी गांव तक पहुंचने लगा है।
चारों ओर फैली हरियाली, बंजर खेत, घने जंगल और शांत वातावरण इसे एक आदर्श प्राकृतिक स्थल बनाते हैं।
📜 निष्कर्ष:
झुरंगु सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि यह गढ़वाल की मिट्टी से जुड़ा हुआ एक गौरवशाली प्रतीक है। यहां की संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों की मेहनत मिलकर इस स्थान को एक आदर्श ग्रामीण मॉडल बनाते हैं। आज जब गांव सड़क, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ रहा है, तब इसके विकास में योगदान देने वाले सभी लोगों को सादर नमन।
झुरंगु ग्राम अपनी प्राकृतिक रमणीयता के साथ-साथ गहन आस्था और आध्यात्मिक परंपराओं का भी केंद्र है। यहाँ अनेक मंदिर स्थित हैं, जो ग्रामवासियों की श्रद्धा और विश्वास के प्रतीक हैं। इन मंदिरों में नृसिंह देवता, बद्रीनाथ देवता, भूमिया देवता, सिद्ध देवता, सुजान देवता तथा कालिंका देवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।ग्राम के सभी लोग आपसी सौहार्द और एकता के साथ अपने-अपने इष्ट देवताओं की पूजा करते हैं। पर्व-त्योहारों एवं विशेष अवसरों पर संपूर्ण गांव एकत्रित होकर भक्ति और श्रद्धा के वातावरण में लीन हो जाता है। यह सामूहिक उपासना न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करती है, बल्कि ग्राम की सामाजिक एकता और पारंपरिक मूल्यों को भी जीवंत बनाए रखती है।
Badrinath Ji Ka mandir

Mandal river, maidaban
पाठको से निवेदन: प्रिय दोस्तो, यह मेरा हिन्दी में पहला लेख है। हम उत्तर भारतीयों के लिये हिन्दी बोलना जितना आसान है, कम्प्यूटर पर लिखना उतना ही मुश्किल। स्वभाविक है व्याकरण की काफ़ी गलतियॉ होगीं, कृप्या नजर-अदांज न करें, टिप्पणी अवश्य करें जिससे भविष्य के लिये मदद मिल सके। समय की बहती धारा एव आधुनिकीकरण की दौर मे हम लोग भी अपनी संस्कृति को खोते जा रहे है ! आने वाली पीड़ी एक अपनी संस्कृति को खोज भी नही पायेगी क्योकि इतिनी तेजी से यदि हमारा संस्कृति बदलती रही तो इसका अस्तित्व ढूदना मुश्किल हो जायगा. !उतराखंड सौंदर्य का जीवन्त प्रतीक है, सरलता एवं गरिमा का अभिषेक है और सभ्यता एवं संस्कृति इसकी विशिष्ट पहचान है। यहाँ प्रकृति और जीवन के बीच ऐसा सामंजस्य हैं जो सभी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहाँ की शीतल हवा शान्ति की प्रतीक हैं तो फलदार वृक्ष दान की महिमा का गुणगान करते हैं। यहाँ के लोक जीवन में परंपराएँ, खेल-तमाशे, मेले, उत्सव, पर्व-त्यौहार, चौफुला-झुमैलो, दैरी-चांचरी, छपेली, झौड़ो के झमाके, खुदेड़ गीत, ॠतुरैण, पाण्डव-नृत्य, संस्कार सभी कुछ अपने निराले अन्दाज में जीवन को सजाते हैं।
अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो आप को हर चीज़ में सुंदरता नज़र आएगी- प्रकृति प्रेमी

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ReplyDeleteआपने इस विषय पर एक बेहतरीन लेख लिखा है, मैं बहुत प्रभावित हुआ। मेरा यह लेख भी पढ़ें मां कालिंका मंदिर
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