Jhurangu, Pauri Garhwal, Uttarakhand- Mr. Amit Bhadula


My Village Jhurangu (झुड़ंगू)

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ग्राम झुडगू ,पोस्ट ऑफिस चामसैन विकासखंड NAINIDANDA तहसील धुमाकोट पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड 
Village Jhurangu PO CHAMSAIN BLOCK NAINIDANDA TEHSIL-DHUMAKOT district Pauri Garhwal Uttarakhand 

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यह स्मृति-लेख हमारे परिवार की पहचान, मूल्य और परंपरा का जीवित दस्तावेज़ है। 🌿
📍 झुरंगु गांव – प्रकृति की गोद में बसा एक सुंदर स्थान.

झुरंगु एक छोटा, लेकिन बहुत ही सुंदर गांव है जो उत्तराखंड राज्य के पौड़ी गढ़वाल जिले में, हल्दुखाल के पास स्थित है। यह गांव पहाड़ियों के बीच बसा है और चारों ओर  जंगलों से घिरा हुआ है। यह गांव अपनी पारंपरिक जीवनशैली, शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।

गांव का प्राचीन इतिहास 

हमारे पूज्य परदादा श्री कृतराम जी के पूर्वजों के नाम तथा उनके मूल निवास का पता न होने के कारण यह वंशावली श्री कृतराम जी के समय से शुरू की जा रही है।

लोगों का कहना है कि हमारे परदादा जी दो भाई श्री कीडू पांडे और श्री लल्लू पांडे सर्वप्रथम जिला गढ़वाल पट्टी-बूंगी के अंतर्गत ग्राम- - झुड़ंगू पहुँचे। उनके पास काफी धन था। ग्राम झुड़ंगू में आने के पश्चात दोनों भाईयों ने सोचा कि एक जगह रहकर शायद हम विकास न कर सकें इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि बड़ा भाई कीडू पांडे उर्फ श्री कृतराम झुड़ंगू में रहेंगे और छोटा भाई लल्लू पांडे उर्फ श्री लालमणि ग्राम महेली पट्टी- इडियाकोट तल्ला जिला पौड़ी गढ़वाल में रहेंगे।
श्री कृतराम जी एक अनुभवी, कर्मठ एवं स्वावलम्बी व्यक्ति थे वे किसी के सामने झुकना नहीं चाहते थे। वह गरीबों की सेवा करने हेतु सदा तत्पर रहते थे। जब उनका क्षेत्र के लोगों से सम्पर्क हुआ तो लोगों ने उन्हें कभी कृतराम जी के नाम से नहीं पुकारा, वह उन्हें माता -पिता के दिए नाम कीडू जी के नाम से ही पुकारा करते थे और उन्हें भी इसी नाम से प्यार था । इसीलिए वह अपना नाम कीडू ही कहलाना पसन्द करते थे।
उनका "कीडू" नाम उन्हें ठीक ही मिला। कहा भी है 'जथो नाम तथो गुण' । कीड़ों (केंचुओं) को मिट्टी प्यारी होती है। इसी प्रकार हमारे परदादा जी श्री कीडू जी को मिट्टी से प्यार था। उन्होंने अपनी धन सम्पत्ति का सदुपयोग किया और जमीन खरीदने में धन को व्यय कर अपने कार्यकाल में ग्राम झुड़ंगू के अतिरिक्त पट्टी - बूंगी में ग्राम चाम सम्पूर्ण, ग्राम मंगेड़ी वल्ली सम्पूर्ण, ग्राम जमूण संपूर्ण ग्राम-कालाखाण्ड लग्गा झुड़ंगू सम्पूर्ण, ग्राम घोड़ाखांद एक भाग, ग्राम वसांणी लग्गा झुड़ंगू सम्पूर्ण, ग्राम कुभीसैंण लग्गा झुड़ंगू सम्पूर्ण, ग्राम बाड़ाधार सम्पूर्ण, ग्राम खड़ीला लग्गा झुड़ंगू सम्पूर्ण, ग्राम बुढाकोट सम्पूर्ण, ग्राम बियासी पल्ली का कुछ हिस्सा, ग्राम जालीखांद आदि तथा इड़ियाकोट में छ: रुपये रकमी जमीन ग्राम चैबाड़ा तथा एक-दो जगह और खरीद कर एक बहुत बड़ा साम्राज्य बनाया और पट्टी बूंगी के थोकदारों की थोकदारी से अपने उपरोक्त समस्त गांवों को तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के द्वारा मुक्त कराकर थोकदारी का दर्जा हासिल किया। यद्यपि इसका उन्हें कोई मालिकाना नहीं मिलता था। वह गरीबों का हमेशा ध्यान रखते थे। जब उन्होंने देखा कि उनके क्षेत्र की जनता को वन विभाग के कर्मचारी तंग करते हैं तो उन्होंने अपने ग्राम के पांच मील रेडियस के क्षेत्र में जन-समाज को राहत पहुंचाने हेतु व्यवस्था की व ग्राम बसांणी और ग्राम कुम्भीसैंण के बीच एक बहुत बड़ा पत्थर जिसमें लोग खाना पका सके व सो
सकें पर वन विभाग के अन्दर अपना अधिकार करा दिया ताकि लोग बांस आदि कास्तकारी का सामान आसानी से ला सकें व उन्हें कोई परेशान न कर सके। मंदाल नदी के किनारे घने जंगल के बीच आज भी वह पत्थर कीडू पांडे का पत्थर कहलाता है ।

श्री कृताराम जी ने वन विभाग के अन्दर मंदाल नदी व रामगंगा नदी के किनारे हमारे जो बाड़ाधार व कालाखांड गांव पड़ते हैं उनके नाम से मछली मारने का हक प्राप्त कर जन-समाज को राहत दिलाई। उन्हें रिजर्व फॉरेस्ट के अन्दर भैंसे, छः ऊंट तथा एक हाथी के चुगान का हक प्राप्त था। कहते हैं उनकी अनेक पत्नियाँ थी जो अलग-अलग गांवों में रहकर वहां का कार्यभार संभालती थी। किन्तु सन्तान केवल एक से ही हुई ।

श्री कृतराम जी के पांच पुत्र थे। जिनके नाम क्रमश: सर्वश्री देवराम जी, लोकमणि जी, दत्तराम जी, उपेन्द्रदत्त जी तथा चन्द्रमणि जी थे। पांचों भाई अधिक समय तक साथ नहीं रह सके और इनमें से श्री देवराम जी, श्री लोकमणि जी तथा श्री दत्तराम जी अलग-अलग हो गए किन्तु श्री उपेन्द्रदत्त जी व श्री चन्द्रमणि जी काफी समय तक एक साथ रहे।
चूंकि श्री उपेन्द्र दत्त जी उस समय फॉरेस्ट रेंजर थे वह अपनी सर्विस के दौरान बाहर रहे इसलिए घर का सारा कार्यभार श्रीचन्द्रमणि जी पर रहा।

श्री कृतराम जी के पांचों पुत्रों की क्रमवार अलग-अलग वंशावली तथा प्रत्येक परिवार के सदस्यों के विषय में ज्ञात / प्राप्त संक्षिप्त जानकारी आगे दी जा रही है।
श्री कृतराम जी के पांच पुत्र :-
  • श्री देवराम जी
  • श्री दत्तराम जी
  • श्री लोकमणि जी
  • श्री चन्द्रमणि जी
  • श्री उपेन्द्र दत्त जी


🗻 भौगोलिक विशेषताएँ:
यह एक पहाड़ी गांव है, और यहाँ कुछ ऊँचे पहाड़ी शिखर (hill columns) भी हैं, जो इसे खास बनाते हैं।
गांव के निवासी विभिन्न जातियों और समुदायों से ताल्लुक रखते हैं, जिससे इसकी संस्कृति में विविधता देखने को मिलती है।


🌲 वन्य जीवन और पारिस्थितिकी:
झुरंगु गांव कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व (Corbett Tiger Reserve) का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह उस रिज़र्व के ठीक सामने एक बफर ज़ोन (Buffer Zone) में स्थित है।
बफर ज़ोन का मतलब होता है – मुख्य अभयारण्य (core zone) के आसपास का इलाका जहाँ सीमित मानव गतिविधियाँ होती हैं, लेकिन वहां भी वन्यजीवन मौजूद होता है।

🦌 यहाँ पाए जाने वाले वन्यजीव:
चीतल (हिरन)
सांभर (एक प्रकार का बड़ा हिरन)
हिमालयी बकरी (Himalayan goat)
भालू, मोर, जंगली मुर्गी, गुलदार, हाथी, लोमड़ी, खरगोश, सूअर,  100 से पक्षियों की प्रजाति 
बाघ (tiger), 
तेंदुआ (leopard)
विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ (bird species)
🌿 प्राकृतिक सौंदर्य:
बफर ज़ोन की सुंदरता घास के मैदानों (grasslands), घने जंगलों (dense forests) और पहाड़ियों से मिलकर बनी है।
यह क्षेत्र खासकर उन लोगों के लिए आदर्श है जो वन्यजीवन और प्रकृति से प्रेम करते हैं।

✨ कुल मिलाकर, झुरंगु एक ऐसा गांव है जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और समृद्ध पारंपरिक जीवनशैली का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास है, बल्कि यह सांस्कृतिक और पारंपरिक रूप से भी एक महत्वपूर्ण गांव है

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🌿 झुरंगु गांव – प्रकृति की गोद में बसा एक नन्हा स्वर्ग 


🌿 झुरंगु गांव – प्रकृति की गोद में बसा एक नन्हा स्वर्ग 🌿
झुरंगु एक छोटा लेकिन अत्यंत सुंदर गांव है, जो उत्तराखंड में कॉर्बेट नेशनल पार्क की सीमा पर स्थित है। यह गांव हिमालय की शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में बसा हुआ है और पार्क के बफर ज़ोन का हिस्सा है। चारों ओर घने जंगल, हरियाली से ढके पहाड़ और उपजाऊ खेतों से घिरा यह गांव प्राकृतिक सौंदर्य और पारंपरिक गढ़वाली जीवनशैली का अद्भुत मेल प्रस्तुत करता है।

भौगोलिक स्थिति:

झुरंगु गांव हल्दूखाल से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहले गांव तक पहुँचने के लिए जंगलों से होकर पैदल जाना पड़ता था, लेकिन अब पक्की सड़क मार्ग बन जाने के कारण यह सफर काफी सुगम हो गया है। गांव से सबसे नजदीकी बाज़ार हल्दूखाल है, जो इस क्षेत्र का मुख्य व्यापारिक केंद्र है। झुरंगु का प्रशासनिक ब्लॉक नैनीडांडा है, जो हल्दूखाल से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।



🚗 सड़क मार्ग और विकास:

 पूर्व प्रधान श्री पीताम्बर दत्त भदूला जी ने अपने कार्यकाल में ग्रामवासियों के सहयोग से बुड़ाकोट से झुरंगु तक एक पर्याप्त चौड़ाई का पैदल मार्ग/सड़क बनवा दिया था। यह मार्ग इतना उपयुक्त था कि टैक्सी आ जा सकती थी। इससे वर्तमान में गांव में रोड पहुंचने में बहुत आसानी हुई । यदि पूर्व में यह पर्याप्त चौड़ाई का पैदल मार्ग न बना होता तो वन विभाग की सख्ती और पेड़ों के कारण सड़क बन पाना या वन विभाग की स्वीकृति मिलना मुश्किल हो जाता।

आज ग्रामीण अपनी निजी गाड़ियों या टैक्सी से सरलता से हल्दूखाल आ-जा सकते हैं। लेकिन अभी भी ट्रक/बस लायक रास्ता नहीं बन पाया।

Jhurangu 

👥 सामाजिक संरचना:

गांव में भदूला, भदोला, कुकरेती, सेमवाल, शिल्पकार लोग सहित कई अन्य जातियों के लोग मिलजुलकर सदियों से निवास करते आ रहे है।

हालांकि आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के चलते गांव के कई लोग देश के अलग-अलग शहरों में रोजगार, शिक्षा व व्यवसाय हेतु बस गए हैं, लेकिन उनका मन आज भी अपने गांव से गहराई से जुड़ा हुआ है।

🌲 प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण:

झुरंगु, कॉर्बेट नेशनल पार्क के बफर ज़ोन में होने के कारण वन्य जीवन और जैव विविधता में समृद्ध है।

यहां आसपास के जंगलों में चीतल, सांभर, तेंदुआ, बाघ, हिमालयी बकरी और विभिन्न पक्षियों की प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं।

चारों ओर फैली हरियाली, घने जंगल और शांत वातावरण इसे एक आदर्श प्राकृतिक स्थल बनाते हैं।

📜 निष्कर्ष:

झुरंगु सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि यह गढ़वाल की मिट्टी से जुड़ा हुआ एक गौरवशाली प्रतीक है। यहां की संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों की मेहनत मिलकर इस स्थान को एक आदर्श ग्रामीण मॉडल बनाते हैं। आज जब गांव सड़क, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ रहा है, तब इसके विकास में योगदान देने वाले सभी लोगों को सादर नमन।

हालांकि यह गांव पहले काफी दूरस्थ और दुर्गम था, लेकिन अब यहां सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं धीरे-धीरे विकसित हो चुकी हैं।



Village Jhurangu via HALDUKHAL 

झुरंगु में अनेक छोटे  छोटे मंदिर हैं  इनमें से नृसिंग देवता , बद्रीनाथ  देवताभूम्या  , कालिंका ,सुजान देवता , हैं , यहाँ के सभी लॉग मिल जुल कर अपने देवताओ की पूजा करते हैं,

           Badrinath Ji Ka mandir

Mandal river, maidaban
 
पाठको से निवेदन: प्रिय दोस्तो, यह मेरा हिन्दी में पहला लेख है। हम उत्तर भारतीयों के लिये हिन्दी बोलना जितना आसान है, कम्प्यूटर पर लिखना उतना ही मुश्किल। स्वभाविक है व्याकरण की काफ़ी गलतियॉ होगीं, कृप्या नजर-अदांज न करें, टिप्पणी अवश्य करें जिससे भविष्य के लिये मदद मिल सके। 
समय की बहती धारा एव आधुनिकीकरण की दौर मे हम लोग भी अपनी संस्कृति को खोते जा रहे है ! आने वाली पीड़ी एक अपनी संस्कृति को खोज भी नही पायेगी क्योकि इतिनी तेजी से यदि हमारा संस्कृति बदलती रही तो इसका अस्तित्व ढूदना मुश्किल हो जायगा. !
उतराखंड सौंदर्य का जीवन्त प्रतीक है, सरलता एवं गरिमा का अभिषेक है और सभ्यता एवं संस्कृति इसकी विशिष्ट पहचान है। यहाँ प्रकृति और जीवन के बीच ऐसा सामंजस्य हैं जो सभी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहाँ की शीतल हवा शान्ति की प्रतीक हैं तो फलदार वृक्ष दान की महिमा का गुणगान करते हैं। यहाँ के लोक जीवन में परंपराएँ, खेल-तमाशे, मेले, उत्सव, पर्व-त्यौहार, चौफुला-झुमैलो, दैरी-चांचरी, छपेली, झौड़ो के झमाके, खुदेड़ गीत, ॠतुरैण, पाण्डव-नृत्य, संस्कार सभी कुछ अपने निराले अन्दाज में जीवन को सजाते हैं।
अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो आप को हर चीज़ में सुंदरता नज़र आएगी- प्रकृति प्रेमी अमित भदुला



Mandal river 


Comments

  1. Are you related with late sri chintamani bhadula

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  2. आपने इस विषय पर एक बेहतरीन लेख लिखा है, मैं बहुत प्रभावित हुआ। मेरा यह लेख भी पढ़ें मां कालिंका मंदिर

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