Jhurangu, Pauri Garhwal, Uttarakhand- Mr. Amit Bhadula
My Village Jhurangu (झुड़ंगू)
- श्री देवराम जी
- श्री दत्तराम जी
- श्री लोकमणि जी
- श्री चन्द्रमणि जी
- श्री उपेन्द्र दत्त जी
| 🌿 झुरंगु गांव – प्रकृति की गोद में बसा एक नन्हा स्वर्ग |
भौगोलिक स्थिति:
झुरंगु गांव हल्दूखाल से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहले गांव तक पहुँचने के लिए जंगलों से होकर पैदल जाना पड़ता था, लेकिन अब पक्की सड़क मार्ग बन जाने के कारण यह सफर काफी सुगम हो गया है। गांव से सबसे नजदीकी बाज़ार हल्दूखाल है, जो इस क्षेत्र का मुख्य व्यापारिक केंद्र है। झुरंगु का प्रशासनिक ब्लॉक नैनीडांडा है, जो हल्दूखाल से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
🚗 सड़क मार्ग और विकास:
पूर्व प्रधान श्री पीताम्बर दत्त भदूला जी ने अपने कार्यकाल में ग्रामवासियों के सहयोग से बुड़ाकोट से झुरंगु तक एक पर्याप्त चौड़ाई का पैदल मार्ग/सड़क बनवा दिया था। यह मार्ग इतना उपयुक्त था कि टैक्सी आ जा सकती थी। इससे वर्तमान में गांव में रोड पहुंचने में बहुत आसानी हुई । यदि पूर्व में यह पर्याप्त चौड़ाई का पैदल मार्ग न बना होता तो वन विभाग की सख्ती और पेड़ों के कारण सड़क बन पाना या वन विभाग की स्वीकृति मिलना मुश्किल हो जाता।
आज ग्रामीण अपनी निजी गाड़ियों या टैक्सी से सरलता से हल्दूखाल आ-जा सकते हैं। लेकिन अभी भी ट्रक/बस लायक रास्ता नहीं बन पाया।
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| Jhurangu |
👥 सामाजिक संरचना:
गांव में भदूला, भदोला, कुकरेती, सेमवाल, शिल्पकार लोग सहित कई अन्य जातियों के लोग मिलजुलकर सदियों से निवास करते आ रहे है।
हालांकि आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के चलते गांव के कई लोग देश के अलग-अलग शहरों में रोजगार, शिक्षा व व्यवसाय हेतु बस गए हैं, लेकिन उनका मन आज भी अपने गांव से गहराई से जुड़ा हुआ है।
🌲 प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण:
झुरंगु, कॉर्बेट नेशनल पार्क के बफर ज़ोन में होने के कारण वन्य जीवन और जैव विविधता में समृद्ध है।
यहां आसपास के जंगलों में चीतल, सांभर, तेंदुआ, बाघ, हिमालयी बकरी और विभिन्न पक्षियों की प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं।
चारों ओर फैली हरियाली, घने जंगल और शांत वातावरण इसे एक आदर्श प्राकृतिक स्थल बनाते हैं।
📜 निष्कर्ष:
झुरंगु सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि यह गढ़वाल की मिट्टी से जुड़ा हुआ एक गौरवशाली प्रतीक है। यहां की संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों की मेहनत मिलकर इस स्थान को एक आदर्श ग्रामीण मॉडल बनाते हैं। आज जब गांव सड़क, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ रहा है, तब इसके विकास में योगदान देने वाले सभी लोगों को सादर नमन।
झुरंगु में अनेक
छोटे छोटे
मंदिर हैं इनमें से नृसिंग देवता , बद्रीनाथ देवता
, भूम्या , कालिंका ,सुजान देवता
, हैं , यहाँ के
सभी लॉग मिल
जुल कर अपने
देवताओ की पूजा
करते हैं,
Badrinath Ji Ka mandir

Mandal river, maidaban
पाठको से निवेदन: प्रिय दोस्तो, यह मेरा हिन्दी में पहला लेख है। हम उत्तर भारतीयों के लिये हिन्दी बोलना जितना आसान है, कम्प्यूटर पर लिखना उतना ही मुश्किल। स्वभाविक है व्याकरण की काफ़ी गलतियॉ होगीं, कृप्या नजर-अदांज न करें, टिप्पणी अवश्य करें जिससे भविष्य के लिये मदद मिल सके। समय की बहती धारा एव आधुनिकीकरण की दौर मे हम लोग भी अपनी संस्कृति को खोते जा रहे है ! आने वाली पीड़ी एक अपनी संस्कृति को खोज भी नही पायेगी क्योकि इतिनी तेजी से यदि हमारा संस्कृति बदलती रही तो इसका अस्तित्व ढूदना मुश्किल हो जायगा. !उतराखंड सौंदर्य का जीवन्त प्रतीक है, सरलता एवं गरिमा का अभिषेक है और सभ्यता एवं संस्कृति इसकी विशिष्ट पहचान है। यहाँ प्रकृति और जीवन के बीच ऐसा सामंजस्य हैं जो सभी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहाँ की शीतल हवा शान्ति की प्रतीक हैं तो फलदार वृक्ष दान की महिमा का गुणगान करते हैं। यहाँ के लोक जीवन में परंपराएँ, खेल-तमाशे, मेले, उत्सव, पर्व-त्यौहार, चौफुला-झुमैलो, दैरी-चांचरी, छपेली, झौड़ो के झमाके, खुदेड़ गीत, ॠतुरैण, पाण्डव-नृत्य, संस्कार सभी कुछ अपने निराले अन्दाज में जीवन को सजाते हैं।
अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो आप को हर चीज़ में सुंदरता नज़र आएगी- प्रकृति प्रेमी अमित भदुला

| Mandal river |











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ReplyDeleteआपने इस विषय पर एक बेहतरीन लेख लिखा है, मैं बहुत प्रभावित हुआ। मेरा यह लेख भी पढ़ें मां कालिंका मंदिर
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